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| लुटयेंस द्वारा राष्ट्रपति भवन का प्रस्तावित फ्लोर प्लान | (1912) |
२. भवन एवं उत्तर-दक्षिण ब्लॉक्स का निर्माण
लुटयेंस के प्लान के अनुसार भवन को अंग्रेजी अक्षर H के आकार में बनाया गया, जिसके पीछे कई मुख्य कारण थे जैसे- यह आकार भवन को अलग-अलग हिस्सों में बाँटने में काफी कारगर था (उत्तर, मध्य, दक्षिण) जिससे वहां की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चल सके, साथ ही साथ व्यवस्थित आवाजाही एवं हवा के प्रवाह के लिए भी यह आकर काफी उपयोगी था |
अन्य इमारतें या घरों के जैसे, इस भवन का कोई भी हिस्सा कभी भी ज़रूरत के हिसाब से नहीं बनाया गया, यह शुरुआत से ही सम्पूर्ण था, इसी सन्दर्भ में लुट्येन्स ने निर्माण के समय एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही, "एक भवन जो की एक संपूर्ण जीव, उत्तम और अविभाज्य हो" | लुट्येन्स के इसी अनूठी सोच, और उत्तम वस्तुकार्य के चलते यह भवन अपने समय से काफी आगे था, जो की हर तरह की चीज़ों से परिपूर्ण, और सुरक्षा के लिहाज़ से अभेद्य, और सबका आकर्षण केंद्रित करने वाला था |
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| निर्माणाधीन भवन (1916) |
एक तरफ़ लुट्येन्स राष्ट्रपति भवन की प्लानिंग करने में लगे थे तो वही दूसरी ओर हर्बर्ट बेकरके नेतृत्व में उत्तर एवं दक्षिणी ब्लॉक्स का निर्माण भी शुरू हो चुका था | दोनों ही ब्लॉक्स का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सरकारी कार्यालयों (वित्त मंत्रालय, रेल भवन, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, आदि) के लिए जगह सुनिश्चित करना था | इन ब्लॉकों को राष्ट्रपति भवन से थोड़ी ही दूर कर्त्तव्य पथ (राजपथ) के दोनों सिरों पर बनाया गया है |
३. भव्यता की पराकष्ठा
340 कमरों वाला यह चार मंज़िला भवन दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्राध्यक्ष निवास है, जिसके परिसर का क्षेत्रफल तीन सौ एकड़ से भी अधिक है |
भवन एवं दोनों ब्लॉकों का निर्माण मुख्यतः धौलपुरी बलुआ पत्थर, संगमरमर, और ग्रेनाइट से किया गया है, जो भारत के विभिन्न हिस्सों से दिल्ली मंगवाए गए | पूरे निर्माण कार्य में स्टील का निम्नतम उपयोग किया गया था | भवन का गुम्बद जो इसे एक अलग विस्तृत पहचान दिलाता है, इसकी प्रेरणा साँची स्तूप एवं संत बासिलिका चर्च, रोम से ली गई थी | इसका निर्माण कंक्रीट से किया गया है, जिसकी बाहरी सतह ताम्बे की महीन चादरों से ढकी गई है, जिससे इसकी सुंदरता और भी उभरकर दिखती है | पूरे भवन में जगह-जगह भारतीय वास्तुकला की विभिन्न तत्वों जैसे- छज्जे, छत्रियां, जालियां, चबूतरा, भव्य प्रांगण आदि, को बहुत ही खूबसूरती से मिश्रित किया गया है, इनकी नक़्क़ाशी के लिए विशेष रूप से आगरा तथा दक्षिणी राज्यों से कारीगरों को बुलाया गया था |
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भवन में छज्जो एवं नक्काशी की झलक साफ़ दिखती है |
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आश्चर्य की बात यह है पूरे निर्माण कार्य में लगभग सत्तर करोड़ ईटों एवं 30 लाख घन फुट बलुआ पत्थर (जो राजस्थान के धौलपुर और भरतपुर से मंगवाए गए) का इस्तेमाल हुआ | पत्थरों की ढुलाई के लिए विशेष रूप से ट्रैन ट्रैक भवन तक बिछाए गए ताकि वे आसानी से निर्माण स्थल तक पहुँचाये जा सके | तक़रीबन तीस हज़ार से भी ज़्यादा मजदूरों ने भवन का निर्माण सत्रह वर्षों में पूर्ण किया |
४. अमृत उद्यान, मंडप एवं जयपुर कॉलम
भवन की सुंदरता पर चार-चाँद लगाने वाला, पंद्रह एकड़ क्षेत्रफ़ल में फ़ैला- अमृत उद्यान, जहां पांच हज़ार से ज़्यादा वृक्ष, और 130 से भी ज़्यादा फूलों की प्रजातियां आंखें आकर्षित कर ही लेती है | उद्यान निर्माण के लिए लुट्येन्स ने मुग़लों द्वारा चारबाग शैली के बगीचों से प्रेरणा ली जिनमे उद्यान को पानी की नहरों द्वारा चार भागो में विभाजित किया जाता है | यह उद्यान प्रत्येक वर्ष बसंत ऋतू में आम जनता के लिए खोला जाता है, जहाँ प्रवेश निःशुल्क रखा जाता है |
जयपुर कॉलम- राष्ट्रपति भवन के मुख्य प्रांगण में स्थित एक 145 फीट ऊँचा भव्य स्तंभ, जिसे जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह ने उपहार स्वरूप बनवाया था। इसके शीर्ष पर लगा 'स्टार ऑफ इंडिया' इस संरचना की सुंदरता और गौरव को बढ़ाता है।
भवन में स्थित गणतंत्र (पूर्व में दरबार हॉल) एवं अशोक मंडप (पूर्व में बॉलरूम) का भारतीय लोकतंत्र में विशेष स्थान है | एक तरफ गणतंत्र मंडप अपनी भव्यता और 22 मीटर ऊंचे गुंबद के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ ऐतिहासिक रूप से देश के पहले राष्ट्रपति ने शपथ ली थी, आज यहाँ नागरिक सम्मान समारोह का आयोजन किए जाते है, तो वहीं दूसरी ओर, अशोक मंडप अपनी अद्भुत छत-चित्रकारी और फारसी शैली के लिए प्रसिद्ध है, जिसका उपयोग विशेष राजकीय भोज और मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोहों हेतु किया जाता है।
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सूर्य की किरणों में अवलोकित अमृत उद्यान |
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भवन में और भी ऐसे कईं अनोखे हिस्से है, परन्तु सभी के बारे में बात करना संभव नहीं है, इसलिए आलेख को विराम देते हुए बस यह कहना चाहूंगा की राष्ट्रपति भवन सिर्फ एक आवास या कार्यालय ही नहीं बल्कि भारतीय लोकतंत्र और कूटनीति का प्रतीक है, और हमें इस लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखना होगा |
धन्यवाद,
सार्थक खोड़े 🙏