खादी और हथकरघा की उपयोगिता
आत्मनिर्भर- एक ऐसा शब्द जो हर देश अपने आगे लगाना चाहता, और आज के इस युग में आत्मनिर्भरता ही एक देश की असल ताकत है | भारत में भी हमे इसका असर देखने को मिलता है जैसे:- पहली पूर्ण स्वदेशी सुपरफास्ट ट्रेन 'वन्दे भारत', भारतीय सॅटॅलाइट लांच व्हीकल (SLV) से चंद्रयान मिशन, मंगलयान का सफल प्रक्षेपण आदि |
परन्तु इन सब के अलावा हमारे खादी और हथकरघा उद्योग का भी भारत की आत्मनिर्भरता में अहम योगदान है | दो ऐसे उद्योग जिन्होंने भारत को विश्व पटल पर अपनी धाक ज़माने में मदद की |दोनों ही उद्योग भारत में लम्बे समय से चले आ रहे है, समय के साथ-साथ इनमे बदलाव आया, पर ना तो इनकी महत्ता और न ही उपयोगिता कम हुई |
खादी उद्योग को तो स्वयं महात्मा गाँधी का समर्थन मिला, उन्होंने सिंथेटिक अंग्रेजी वस्त्रों का परित्याग कर खादी से निर्मित वस्त्र अपनाने का सन्देश दिया ताकि भारत आत्मनिर्भर बन सके और रोज़गार के नए अवसर प्रदान किए जा सके | इन्ही सब प्रयासों के फलस्वरूप आज भारत विश्व का सबसे बड़ा खादी उत्पादक देश है | खादी की उपयोगिता इस कदर है की विदेशों में भी खादी से निर्मित वस्तुएं एवं वस्त्र उच्च दामों में बिक रहें है |
भारत के हथकरघा उद्योग भी कई कीर्तिमान स्थापित कर चुके है जैसे दुनिया का ९५ प्रतिशत हथकरघा कपड़ा भारतीय बाज़ार से आता है, भारत 125 देशों को हथकरघा कपड़ा निर्यात करता है | इन्ही कारकों की वजह से आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथकरघा कपड़ों का निर्यातक देश है | एक ऐसा उद्योग जिसने तीस लाख से ज्यादा लोगों को रोज़गार दिया, और स्वयं भारत सरकार भी इस उद्योग इस उद्योग की उपयोगिता समझ चुकी है और इसलिए कई करघों में सरकार द्वारा आधुनिक उपकरण तथा सुरक्षित वातावरण प्रदान किया गया है | सरकार ने हथकरघा उद्योग से जुड़ने के लिए कई योजनाए भी संचालित की है ताकि रोज़गार के और अवसर सृजित किये जा सके |
हालाँकि, इन दोनों ही उद्योगों को भारत में औद्योगिकीकरण के चलते चोट सहनी पड़ी और इनकी गति मंद पड़ने लगी एवं कारखाने बंद होने लगे | परन्तु 'मेक इन इंडिया' अभियान के चलते इन उद्योगों को पुनर्जीवित होने का अवसर मिला, और इन्होने अपनी महत्ता सिद्ध की | आज हाल यह है की खादी उद्योग ने वित्त-वर्ष 2021-22में एक लाख पंद्रह हज़ार करोड़ का कारोबार किया तथा हथकरघा उद्योग ने भी आठ हज़ार करोड़ रूपये का कारोबार किया | इन अंकों को देखकर हम निश्चित तौर पर यह तो कह सकते है की विश्व के वस्त्र उद्योग में भारत का बहुत बड़ा हाथ है |
जय हिन्द !
धन्यवाद,
सार्थक खोडे़
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