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महाराणा प्रताप

 महाराणा प्रताप 

पराक्रम, शौर्य, वीरता, साहस यह सभी शब्द मेवाड़ के महाराणा प्रताप पर बिलकुल सटीक बैठते है | भारत के वीर योद्धा महाराणा प्रताप, जिन्होंने अपनी देशभक्ति के जज़्बे और फौलादी इरादों से मुग़लों का सामना किया | उन्होंने खुद राज-सुख त्याग दिया और जंगलों में भील एवं आदिवासी कबीलों के साथ रहने लगे और उनकी जीवन शैली का अनुसरण करने लगे ताकि वे उन्हें भरोसा दिला सके की वे हमेशा उनके साथ है | उन्होंने अपना पूरा जीवन मेवाड़ की रक्षा करने में बिताया | सन् 1597 में उनका देहवासन हुआ | आज भी राजस्थान के कई गावों में उन्हें भगवान की तरह पूजा जाता है |

परन्तु आजकल हमारी स्कूल की पुस्तकों में उनका कहीं भी वर्णन नहीं है, बल्कि विदेशी आक्रान्ताओं और उनके द्वारा किये गए हमलों का उल्लेख है | हमें हमारी आने वाली पीढ़ी को इन महान व्यक्तित्वों के बारे में बताना ही होगा ताकि वे इन्हें और इनके बलिदानों को याद रखे

प्रस्तुत है महाराणा प्रताप के बारे में मेरे द्वारा स्वलिखित कविता |

                                                                                                            

                                                                 मेवाड़ के महाराणा 

 सन् १५४० में एक ऐसा योद्धा जन्मा,

जिसके नाम से डरते बड़े बड़े सुरमा,

बचपन से था जिसने बस एक सपना संजोया,

मेवाड़ के जन-जन में आज़ादी का बीज बोया |

उसे मुग़लों को हराना था,

सदा मेवाड़ पर विजयी पताका फहराना था |

शुरू हुआ युद्ध हल्दीघाटी का

खड़े योद्धा मैदान में बचाव करने अपनी माटी का |

बहलोल खान ने आतंक मचाया,

महाराणा ने उसे घोड़े सहित दो टुकडो में मार गिराया |

चेतक ने भी सदा साथ निभाया,

महाराणा को २२ फीट लम्बा नाला पार कराया |

कईं योद्धाओं ने दिया अपने प्राणों का बलिदान,

बचाने के लिए मेवाड़ की आन बान और शान |

धन्यवाद्,

सार्थक खोडे 🙏

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