छत्रपति शिवाजी महाराज
स्वराज्य का जिसने बिगुल बजाया,
वीर मराठा योद्धा आया |
भगवा था जिसने फ़हराया,
बदली जिसने भारत की काया |
माँ थी जिनकी जीजाबाई,
ना पढने दी शत्रुओं की परछाई |
उनको मिटाने की कसम खाई,
छत्रपति की पदवी पाई |
अफजल खान को मार गिराया,
मुगलों को बहुत छकाया |
संभाजी सा पुत्र है पाया,
मराठों में विश्वास जगाया |
मुगलों ने की दक्कन की चढ़ाई,
शिवाजी ने धूल चटाई |
छापामार रणनीति अपनाई,
मराठों को विजय दिलाई |
गुरु जिनके रामदास जी,
सेना में जिनके थे बाजीराव तान्हाजी |
मुट्ठी में कर लेते थे वो हर एक बाज़ी,
नाम था उनका श्री छत्रपति शिवाजी |
जय शिवराय |
🙏🙏🙏
धन्यवाद,
सार्थक खोडे़
A phenomenal and beautiful piece of poetry. Any number of words are less to describe the aura, persona and temperament of Chhatrapati Shivaji Maharaj, But this poem is both sublime and descriptive. Hope it was a bit longer covering various aspects of Maharaj's life but this too is splendid in it's own way.
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