चुनाव पे चर्चा
कुल मिलकर बात यह है की एनडीऐ गठबंधन ने बहुमत का आकड़ा पार कर लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की ओर कदम बढ़ाएं और वहीँ इंडिया गठबंधन की भले ही जीत न हुई हो परन्तु वह अपने परिणाम से ज्यादा खुश एनडीऐ की सीटें देखकर हुए होंगे | यह सब चुनावी खींचतान के बीच एक सीमित सोच वाले आदमी को बस यही चाहिए की सरकार सब्सिडी देती रहे और मैं लेता रहूँ फिर चाहे देश में कुछ भी हो, दैनिक ज़रूरतों के भाव न बढें परन्तु मेरा बैंक बैलेंस भरता रहे |
यहाँ मैं हमारे स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के कथन को याद दिलाना चाहूँगा- "मुझे ना इस्लाम से डर है ना अंग्रेजों से मुझे डर हिन्दुओं के हिंदुत्व के खिलाफ होने से है", इस कथन के अभिप्राय के लिए मैं अंग्रेज़ी शब्दावली के संक्षेपाक्षर (Abbreviation) Iykyk (If you know, you know) का उपयोग करना चाहूँगा, बाकि मतलब आप समझ चुके होंगे | अंततः सभी से विनम्र निवेदन कि हमारी एक ऊँगली में इतनी शक्ति है की हम किसी को भी चुन सकते है, इसलिए अपना मत सोच समझकर, किसी के बहकावे में आकर न बदलें |
जय हिन्द !
धन्यवाद,
सार्थक खोड़े 😊
एक जागरूक नागरिक

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